एक छोटे से घर में नानी रहती थीं। उनका आँगन साफ-सुथरा था और शाम को रोज़ दीपक जलता था। नानी का जीवन सरल था—बिना किसी शिकायत के। फिर भी, कहीं न कहीं एक हल्की-सी ख़ामोशी थी। नानी मन ही मन बोलीं, “जीवन ने बहुत दिया है… बस हँसी की आवाज़ थोड़ी दूर चली गई है।”
1.नानी का शांत घर